Amavsya 2026: अमावस्या के अनसुने उपाय! कौन से काम भूलकर भी न करें?
अमावस्या वह तिथि है जब आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिरता का कारक माना गया है। इसलिए अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, पितृ तर्पण, नकारात्मक ऊर्जा की शुद्धि और नए संकल्प लेने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। आज ओमांश एस्ट्रोलॉजी अमावस्या के विशेष उपायों से जुड़ी अहम जानकारी लेकर प्रस्तुत है!
अमावस्या हर महीने आती है, लेकिन कुछ अमावस्याएँ विशेष महत्व रखती हैं जैसे –
मौनी अमावस्या
शनि अमावस्या
दीपावली अमावस्या
सोमवती अमावस्या
इन विशेष तिथियों पर किए गए उपाय शीघ्र फलदायी माने जाते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं। इस योग से मन थोड़ा अस्थिर या संवेदनशील हो सकता है। जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, वे इस दिन मानसिक बेचैनी, थकान या नकारात्मक विचार अनुभव कर सकते हैं।
यह दिन विशेष रूप से इन कार्यों के लिए शुभ है! जैसे कि पितृ दोष निवारण कालसर्प या शनि संबंधित कष्टों की शांति या फिर धन बाधा दूर करना हो !
1. पितृ शांति के उपाय
अमावस्या का संबंध पितरों से माना जाता है। यदि जीवन में बार-बार रुकावट, धन हानि, या परिवार में अशांति हो रही हो, तो पितृ तर्पण अवश्य करें।
उपाय:
सुबह स्नान कर काले तिल, जल और कुश से तर्पण करें।
पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
“ॐ पितृदेवाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
इससे पितृ कृपा प्राप्त होती है और अटके कार्य बनने लगते हैं।
2. धन प्राप्ति के लिए अमावस्या के उपाय
यदि धन का प्रवाह रुक गया हो या अचानक खर्च बढ़ गया हो, तो अमावस्या की रात ये उपाय करें:
घर के मंदिर में 11 दीपक जलाएं।
लक्ष्मी जी को खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
तिजोरी में 11 कौड़ियां लाल कपड़े में बांधकर रखें।
“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
दीपावली की अमावस्या विशेष रूप से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।
3. शनि दोष और बाधा निवारण
यदि शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि की महादशा चल रही हो तो अमावस्या के दिन शनि उपाय करना अत्यंत लाभकारी होता है।
विशेषकर शनि अमावस्या पर:
काली उड़द, काला तिल और तेल का दान करें।
शनि मंदिर में सरसों तेल का दीपक जलाएं।
“ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जप करें।
यह उपाय कार्य में रुकावट, कोर्ट-कचहरी, ऋण और शत्रु बाधा से राहत देता है।
4. नकारात्मक ऊर्जा हटाने के उपाय
यदि घर में बार-बार झगड़ा, बीमारी या भारीपन महसूस हो, तो अमावस्या पर ये उपाय करें:
पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
नमक मिले पानी से पोछा लगाएं।
एक नारियल लेकर पूरे घर में घुमाकर बहते पानी में प्रवाहित करें।
हनुमान चालीसा का पाठ करें।
इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शांति आती है।
5. मनोकामना पूर्ति के लिए
अमावस्या आत्मशुद्धि और संकल्प का दिन है।
रात 12 बजे शांत मन से दीपक जलाएं।
अपनी मनोकामना स्पष्ट शब्दों में लिखें।
21 दिन तक नियमित मंत्र जप का संकल्प लें।
यदि चंद्रमा कमजोर हो तो सोमवार से 16 सोमवार व्रत आरंभ करने का संकल्प भी इसी दिन लिया जा सकता है।
6. स्नान और दान का महत्व
अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यदि संभव न हो तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
अमावस्या के दिन दान में ये वस्तुएं शुभ मानी जाती हैं:
काला तिल
कंबल
चावल
गुड़
दीपक
दान सदैव श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार करें।
❌ अमावस्या पर क्या न करें?
*झूठ, छल या किसी का अपमान न करें।
*नशा या मांसाहार से बचें (विशेषकर पितृ अमावस्या पर)।
*किसी से उधार लेने या देने से बचें।
*रात में अकेले सुनसान स्थान पर न जाएं।
विशेष टिप (ज्योतिषीय सलाह)
*यदि कुंडली में चंद्रमा नीच का हो या राहु-केतु से पीड़ित हो, तो अमावस्या पर चांदी का छोटा टुकड़ा अपने पास रखें।
*जिनकी कुंडली में पितृ दोष हो, वे लगातार 3 अमावस्या तक तर्पण करें।
*धन रुकावट हो तो 3 अमावस्या तक लक्ष्मी मंत्र जप करें।
अमावस्या अंधकार का प्रतीक नहीं,
बल्कि नए प्रकाश की तैयारी का दिन है। यह आत्मचिंतन, पूर्वजों
के प्रति कृतज्ञता और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का अवसर है। यदि श्रद्धा, नियम और सकारात्मक भाव से उपाय किए जाएं, तो जीवन में अद्भुत परिवर्तन संभव है।












